न्यूज़ टुडे ब्रेकिंग अपडेट : नई दिल्ली

डा. राजेश अस्थाना, एडिटर इन चीफ, न्यूज़ टुडे मीडिया समूह
*NEET-UG 2026 परीक्षा की आड़ में मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. इस मामले में मोतिहारी निवासी RJD के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस बीच सरकार ने आगामी 21 जून को पुनः परीक्षा लेने की घोषणा की है.*
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो NEET-UG 2026 परीक्षा की आड़ में मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने की एक धोखाधड़ी वाली योजना में शामिल था. इस मामले के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मोतिहारी के रहने वाले और RJD के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल भी शामिल हैं. क्राइम ब्रांच के अनुसार, संतोष जायसवाल इस पूरे गिरोह का सरगना है. संतोष जायसवाल पूर्वी चंपारण जिले के घोडासहन स्थित लेन गांव का रहने वाला है और पिछले कुछ सालों से राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल था.
RJD नेता संतोष जायसवाल के गांव के लोग बताते हैं कि कुछ ही साल पहले तक उसके पिता एक सिनेमा हॉल में काम करते थे. हालांकि, बहुत कम समय में ही संतोष ने काफी दौलत जमा कर ली और करोड़पति बन गया. 2020 में संतोष जायसवाल के भाई, डॉ. राजन जायसवाल ने प्लूरल्स पार्टी की तरफ से ढाका विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. कई सालों तक, संतोष जायसवाल घर से दूर रहा और सिर्फ त्योहारों या खास मौकों पर ही घर आता था.

ज्ञात हो कि इलाके के लोग लंबे समय से भले ही दबी जुबान में यह चर्चा करते रहे हैं कि MBBS से जुड़ी योजनाओं के पीछे संतोष जायसवाल ही मास्टरमाइंड है. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने घोड़ासहन-ढाका इलाके के कई डॉक्टरों को MBBS की डिग्री दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, ये वही डॉक्टर हैं जो आज भी अपने क्लिनिक चला रहे हैं, हालांकि, गांव में बहुत कम लोगों को ही अभी उनकी गिरफ्तारी की खबर के बारे में पता है.
20 लाख रुपये में मेडिकल सीट की ‘गारंटी’
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपी संतोष जायसवाल और उसके साथी अभ्यर्थियों को NEET परीक्षा में पास कराने और मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का झांसा देते थे। इसके बदले में प्रति छात्र करीब 20 लाख रुपये तक की मांग की जाती थी। यह गिरोह खुद को इतना प्रभावशाली बताता था कि अभिभावक आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे। आरोपी लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में सक्रिय रहा है।

संगठित तरीके से चलता था ठगी का नेटवर्क
पकड़े गए आरोपियों में एक डॉक्टर भी शामिल है, जो इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह निम्नलिखित तरीकों से ठगी को अंजाम देता था:
*फर्जी दस्तावेज: छात्रों को विश्वास दिलाने के लिए जाली कागजात तैयार करना।
*मैनेजमेंट कोटा का झांसा: प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों में सेटिंग होने का दावा करना।
*लेन-देन के सबूत: पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
RJD के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी की गिरफ्तारी के बाद बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है और इसमें कुछ और रसूखदार लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल, पुलिस जब्त किए गए मोबाइल डेटा और बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है।
बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में वह रक्सौल विधानसभा क्षेत्र से RJD का टिकट पाने के लिए एक मजबूत दावेदार थे. हालांकि, यह सीट कांग्रेस पार्टी के खाते में चली गई. चुनाव की तैयारियों पर भी काफी पैसा खर्च किया गया था. यह ध्यान देने योग्य है कि 2 मई को सूरत पुलिस को यह जानकारी मिली कि दिल्ली में कुछ लोग NEET के उम्मीदवारों से उन्हें प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने और MBBS प्रोग्राम में सीटें दिलाने के बहाने बड़ी रकम वसूल रहे थे. इस जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने तकनीकी निगरानी का सहारा लेते हुए,
महिपालपुर एक्सटेंशन में स्थित कई होटलों पर छापे मारे. इस दौरान 18 छात्रों को गिरोह के चंगुल से बचाया गया, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे.
पूछताछ में आरोपी छात्रों और उनके परिजनों से 20 से 30 लाख रुपये तक की मांग करते थे. इसके बदले मेडिकल कॉलेज में दाखिला और कथित प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था. पुलिस ने बताया कि फर्जी प्रश्न पत्र पुराने पेपर और कोचिंग सामग्री के आधार पर तैयार किए गए थे. गाजियाबाद के एक फ्लैट पर छापेमारी कर पुलिस ने संत प्रताप सिंह और डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम को भी गिरफ्तार किया. मौके से 149 पन्नों की कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री, खाली हस्ताक्षरित चेक और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं.

पुलिस की अपील – सावधानी ही बचाव है:
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों के लिए चेतावनी जारी की है:
*भ्रामक दावों से बचें: NEET परीक्षा की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन है। कोई भी व्यक्ति सीधे तौर पर एडमिशन नहीं करा सकता।
*दलालों से दूरी: मेडिकल सीट के नाम पर किसी भी बिचौलिये या दलाल को पैसे न दें।
*शिकायत करें: यदि कोई आपसे एडमिशन के नाम पर रुपयों की मांग करता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।














