न्यूज़ टुडे एक्सक्लूसिव : बिहार के सांस्कृतिक वैभव को नई ऊँचाई देगा बजट 2026-27: कला एवं संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण घोषणाएँ

न्यूज़ टुडे एक्सक्लूसिव : पटना

डा. राजेश अस्थाना, एडिटर इन चीफ, न्यूज़ टुडे मीडिया समूह 

बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना बजट प्रस्तुत किया है। गौरवशाली अतीत और आधुनिक नवाचारों के संगम के साथ, विभाग ने राज्य की कला, संस्कृति और शिल्प को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं और उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया है।

बजट की मुख्य बातें और योजनाएँ:

1. कलाकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सम्मान : 

मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना

राज्य के वरिष्ठ और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों के लिए ₹3,000 प्रति माह की पेंशन सहायता का प्रावधान है। प्रथम चरण में 85 कलाकारों का चयन कर उन्हें लाभान्वित किया गया है।

बिहार कला सम्मान

राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकारों को सम्मानित करने के लिए 24 सितंबर 2025 को 52 कलाकारों को कुल ₹27.00 लाख की पुरस्कार राशि वितरित की गई।

आर्टिस्ट रजिस्ट्रेशन पोर्टल

अब तक 5000 से अधिक कलाकारों ने इस पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, जिससे लक्षित कल्याण वितरण में पारदर्शिता आएगी।

2. सांस्कृतिक अवसंरचना का विस्तार (अटल कला भवन):

राज्य में आधुनिक सांस्कृतिक केंद्रों के निर्माण के लिए व्यापक निवेश किया जा रहा है। प्रमंडलीय मुख्यालय दरभंगा, पूर्णिया, गया, सारण और बेगूसराय में लगभग 600 दर्शक क्षमता वाले आधुनिक प्रेक्षागृह (अटल कला भवन) निर्मित किए गए हैं।

विशेष परियोजनाएँ :

बेतिया, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में ₹137.54 करोड़ की लागत से 2000 क्षमता वाले भव्य प्रेक्षागृहों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

3. मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना:

विलुप्तप्राय कलाओं को संरक्षित करने के लिए अनुभवी कलाकारों को ‘गुरु’ और युवाओं को ‘शिष्य’ बनाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें गुरुओं को ₹15,000, संगतकारों को ₹7,500 और शिष्यों को ₹3,000 की मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है।

4. फिल्म विकास और नई नीति 2024

बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति 2024: 

इस नीति के तहत राज्य में 38 से अधिक फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग को अनुमति दी गई है।

अनुदान: 

बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम को प्रतिवर्ष ₹10.00 करोड़ का अनुदान दिया जा रहा है।

बिहार फिल्म एवं ड्रामा संस्थान: 

राज्य में ही अभिनय और तकनीकी कौशल विकास के लिए इस संस्थान की स्थापना को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है।

5. विरासत का संरक्षण और राष्ट्रीय पहचान:

झिझिया नृत्य का विश्व रिकॉर्ड: विभाग के सहयोग से 1,012 महिलाओं द्वारा झिझिया लोकनृत्य की प्रस्तुति को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया गया।

ऐतिहासिक स्थलों का विकास: नालंदा, विक्रमशिला, महाबोधि मंदिर (गया) और राजगीर जैसे स्थलों की ऐतिहासिक गहराई को वैश्विक पर्यटन से जोड़ने पर बल दिया गया है।

6. युवा प्रतिभाओं को मंच (राष्ट्रीय युवा उत्सव 2026):

बिहार की युवा प्रतिभाओं ने 29वें राष्ट्रीय युवा उत्सव 2026 में अपनी कला का प्रदर्शन किया। राज्य स्तरीय युवा उत्सव 2025 का आयोजन मधुबनी में किया गया, जिसमें 1200 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

7. संग्रहालयों का आधुनिकीकरण और विस्तार:

पटना संग्रहालय:

₹158.00 करोड़ की लागत से इसका उन्नयन कर पुराने और नए भवन को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। इसका उद्घाटन 27 जुलाई, 2025 को किया गया।

बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय- सह-स्मृति स्तूप, वैशाली:

₹550.48 करोड़ की लागत से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के संरक्षण हेतु निर्मित इस भव्य परिसर का उद्घाटन 29.07.2025 को संपन्न हुआ।

अन्य पहल:

मधुबनी में मिथिला ललित संग्रहालय का निर्माण पूर्ण हो चुका है। साथ ही सहरसा, हाजीपुर और बिहारशरीफ में नए क्षेत्रीय संग्रहालयों की प्रक्रिया गतिमान है।

8. भारतीय नृत्य कला मंदिर का पुनरुद्धार:

पटना स्थित प्रतिष्ठित भारतीय नृत्य कला मंदिर के प्रेक्षागृह और भवन की मरम्मत हेतु ₹498.00 लाख की स्वीकृति दी गई है, जिससे कलाकारों को आधुनिक मंच और अभ्यास सुविधा प्राप्त होगी।

9. पुरातत्व और विरासत संरक्षण:

लखीसराय स्थित ऐतिहासिक लाल पहाड़ी के संरक्षण और पर्यटन विकास हेतु ₹29.29 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना प्रारंभ की गई है।

दरभंगा के अहिल्या स्थान मंदिर परिसर के संरक्षण हेतु ₹12.77 करोड़ की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

10. वित्तीय वर्ष 2026-27 की भावी योजनाएं:

आगामी वर्ष के लिए सरकार ने 15 प्रमुख लक्ष्यों को निर्धारित किया है, जिनमें मुख्य हैं:

बिहार में फिल्म सिटी और फिल्म एवं नाट्य संस्थान की स्थापना।

राजकीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत।

छठ पूजा को यूनेस्को (UNESCO) की ‘विश्व अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची’ में शामिल कराने का प्रयास।

‘म्यूजियम ऑन व्हील्स’ (मोबाइल म्यूजियम) का संचालन।

गोलघर एवं मॉरिसन भवन का संयुक्त पुनरुद्धार।

तकनीकी एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग:

सरकार ने भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम’ मिशन के अंतर्गत पांडुलिपि संरक्षण हेतु MOU किया है। साथ ही, 5 प्रमुख संग्रहालयों में अत्याधुनिक VR (Virtual Reality) प्रोजेक्शन यूनिट स्थापित करने की योजना प्रक्रियाधीन है।

“वित्तीय वर्ष 2026-27 का यह बजट बिहार की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा का सशक्त दस्तावेज है। यह बजट बिहार के सांस्कृतिक उत्थान का रोडमैप है। यह केवल योजनाओं और आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक दृष्टि से जोड़ने का संकल्प है। ₹400 करोड़ के प्रावधान के साथ हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—कला और संस्कृति के माध्यम से रोजगार, पर्यटन और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना। बिहार की कला केवल विरासत नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की शक्ति है।” -अरुण शंकर प्रसाद, मंत्री,कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार

यह बजट केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य के निर्माण की आधारशिला है। हमारा लक्ष्य कला और संस्कृति के माध्यम से सामाजिक समरसता, रोजगार सृजन और पर्यटन को बढ़ावा देकर बिहार को एक सशक्त सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

कला एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से राज्य सरकार न केवल मधुबनी पेंटिंग, सिक्की शिल्प और तसर सिल्क जैसी पारंपरिक विधाओं को बचा रही है, बल्कि ₹400 करोड़ के कुल बजट प्रावधानों के साथ कलाकारों को एक सशक्त और आधुनिक मंच प्रदान कर रही है। “बिहार की कला और संस्कृति केवल विरासत नहीं, बल्कि एक सतत प्रवाह है।”

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