न्यूज़ टुडे टीम एक्सक्लूसिव : आपराधिक मामलों के गवाहों को अब राज्य सरकार पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेगी, कैबिनेट की बैठक में बिहार गवाह सुरक्षा योजना, 2018 सहित 18 प्रस्तावों को मंजूरी

न्यूज़ टुडे टीम एक्सक्लूसिव : पटना/ बिहार : 

गवाह के परिजनों को भी सरकार प्रदान करेगी सुरक्षा
गवाह का टेलीफोन नंबर बदला जा सकता है, मिलेगा गोपनीय नंबर 
एक पुलिसकर्मी को गवाह की सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा नामित
कैट की तर्ज पर बिहार के कर्मियों के लिए गठित होगा ट्रिब्यूनल

आपराधिक मामलों के गवाहों को अब राज्य सरकार पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बिहार गवाह सुरक्षा योजना, 2018 सहित 18 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में दायर रिट पिटीशन (क्रिमिनल) के मामले में पारित आदेश के पालन में बिहार गवाह सुरक्षा योजना, 2018 को कैबिनेट में स्वीकृति दी गयी है. उन्होंने बताया कि क्रिमिनल केस में गवाहों को धमकी मिलती थी, उनकी जान को खतरा रहता है. ऐसे में सुरक्षा सुनिश्चित की जानी है.

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नयी योजना से अब हर जिले में गवाहों की सुरक्षा के लिए कमेटी गठित होगी. गवाहों को खतरे और सुरक्षा को लेकर कमेटी के पास आवेदन करना होगा. इसके बाद कमेटी अध्ययन करके गवाहों को सुरक्षा प्रदान करेगी. खतरे का अध्ययन करके जो आवश्यक सुरक्षा की आवश्यकता होगी,उसे दी जायेगी. इससे गवाह सुरक्षित रह सकेंगे और निर्भीक होकर गवाही दे सकेंगे. इसके साथ ही सरकार  गवाह सुरक्षा कोष बनायेगी, जिसमें अलग से राशि दी जायेगी.

उस राशि से गवाहों को अलग-अलग प्रकार की सुरक्षा दी जायेगी. मसलन सुरक्षा के तहत जरूरत पड़ने पर गवाह का टेलीफोन नंबर बदला जा सकता है, अथवा गवाह को गोपनीय नंबर दिया जा सकता है. गवाह के घर पर सीसीटीवी कैमरा और अलार्म वाला दरवाजा लगाया जा सकता है. गवाह की पहचान छुपाते हुए उसका कोड नाम देकर उसे मुकदमे में प्रस्तुत किया जा सकता है. 

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एक पुलिस कर्मी को गवाह के लिए नामित किया जा सकता है जो गवाह को कोई भी खतरा होगा तो वह उस कर्मी को तुरंत फोन करेगा. गवाह के घर के आसपास गहन सुरक्षा का इंतजाम व नियमित गश्त करायी जा सकती है. गवाह को अस्थायी रूप में किसी दूसरे घर में शिफ्ट करवाया जा सकता है. गवाह को कोर्ट में आने जाने के लिए स्कॉट या सरकारी वाहन दिया जा सकता है. 

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गवाह की गवाही न्यायाधीश के समक्ष व वीडियो कैमरे में (व्यक्ति विचारण कक्ष में)करायी जा सकती है. गवाही सार्वजनिक नहीं होगी. ऐसी भी व्यवस्था होगी जिससे कोर्ट में आते जाते हुए  गवाह और अभियुक्त का आमना-सामना नहीं हो. गवाह-अभियुक्त के बीच किसी तरह का तनाव नहीं हो. इससे ट्रायल बेहतर प्रकार से हो सकता है. 

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केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम (कैट) की तर्ज पर बिहार के कर्मचारियों के लिए बिहार प्रशासनिक न्यायाधिकरण का गठन किया जायेगा.  

बिहार प्रशासनिक न्यायाधिकरण के गठन संबंधी अधिसूचना जारी करने के लिए भारत सरकार को अनुरोध पत्र भेजा जायेगा. अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने बताया कि केंद्र की तर्ज पर बिहार प्रशासनिक न्यायाधिकरण के गठन होने से बिहार सरकार के कर्मचारियों के मुकदमों की सुनवाई यहां पर होगी. इससे हाइकोर्ट में होनेवाले मुकदमों में कमी आयेगी जिससे कोर्ट पर भी केस का दबाव कम होगा. साथ ही कर्मचारियों को जल्द न्याय मिलेगा. 

इसके अलावा कैबिनेट द्वारा पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के बिहार अवर वन सेवा (संशोधन) नियमावली, 2019 को स्वीकृति दी गयी. विभाग में बड़ी संख्या में नियुक्ति की गयी है. नयी नियमावली के प्रभावी होने के बाद जूनियर स्टाफ की नियुक्ति जल्द होगी. इस नियमावली से 902 फॉरेस्ट गार्ड की बहाली का रास्ता साफ हो गया है. इसके अलावा बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार,पटना के परामर्शी के मानदेय में संशोधन की स्वीकृति दी गयी है.

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पटना एयरपोर्ट के रिनोवेशन को 61.57 करोड़ स्वीकृत

कैबिनेट द्वारा मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग (सिविल विमानन निदेशालय) के स्वामित्व वाली पटना हवाई अड्डा स्थित 8.65 एकड़ भूमि पर रिनोवेशन के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में 61 करोड़ 57 लाख की राज्य योजना की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी है. 

इस राशि से एयरपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के लिए दो हैंगर, प्रशासनिक भवन और अति विशिष्ट कक्ष का निर्माण होगा. साथ ही बिहार उड्डयन संस्थान के लिए एक हैंगर, प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, एप्रोच पथ और एप्रोन आदि का निर्माण कार्य भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से कराया जायेगा.

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