न्यूज़ टुडे टीम अपडेट : भाजपा के वरीय नेता सतीश चंद्र दुबे निर्विरोध चुनकर विधिवत राज्‍यसभा के सांसद बने, विरोध में कोई भी खड़ा नहीं हुआ

न्यूज़ टुडे टीम अपडेट : पटना/ बिहार :

भाजपा के वरीय नेता सतीश चंद्र दुबे बुधवार को विधिवत राज्‍यसभा के सांसद बन गये। वे निर्विरोध चुने गए। विधानसभा के सचिव ने सर्टिफिकेट प्रदान किया। राज्यसभा में भाजपा नेता व पूर्व सांसद सतीश चंद्र दुबे का कार्यकाल सात जुलाई 2022 तक होगा।

श्री दुबे के विरोध में कोई भी खड़ा नहीं हुआ था। न महागठबंधन की ओर से कोई उम्‍मीदवार था और न ही इसमें शामिल घटक दल की ओर से ही कोई प्रत्‍याशी खड़ा हुआ था। एनडीए में शामिल घटक दल जदयू ने भी उम्‍मीदवार देने में हाथ खड़े कर दिए थे।  

भाजपा नेता सतीश चंद्र दुबे ने चार अक्‍टूबर को राज्‍यसभा के लिए एनडीए की ओर से नामांकन का पर्चा भरा था। इसके अगले दिन पांच अक्‍टूबर को पर्चे की जांच हुई। पर्चा सही पाया गया था। उन्‍होंने विधानसभा के सचिव एवं आयोग के निर्वाची पदाधिकारी बटेश्वर नाथ पांडेय के सामने पर्चा भरा था। दुबे के अलावा किसी और ने नामांकन नहीं किया। नौ अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तिथि थी।

अपराह्न तीन बजे तक नाम वापसी नहीं किये जाने के बाद सतीश चंद्र दुबे राज्‍यसभा सांसद निर्विरोध बन गए। दरअसल इकलौते नामांकन के बाद ही सतीश चंद्र दुबे के निर्विरोध विजयी घोषित होने का रास्ता साफ हो गया था। केवल औपचारिकता बाकी रह गई थी।

बता दें कि राष्‍ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी के निधन से बिहार कोटे की यह सीट खाली हुई थी। इसी सीट के लिए उपचुनाव कराया गया था। इधर भाजपा सांसद ने दोपहर तीन बजे बाद विधानसभा पहुंचकर विधानसभा के सचिव और निर्वाची अधिकारी बटेश्वर नाथ पांडेय से जीत का प्रमाण पत्र लिया। इस मौके पर दुबे के साथ भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष रेणु देवी और विधान पार्षद संजय मयूख मौजूद थे। 

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में सतीश चंद्र दुबे भाजपा के टिकट पर  वाल्मिकीनगर से जीते थे। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में यह सीट गठबंधन धर्म में जनता दल यू के कोटे में चली गई थी।

टिकट से वंचित होने से सतीश चंद्र दुबे काफी नाराज थे। बाद में उन्‍हें पार्टी स्‍तर पर मनाया गया था। इसके बाद वे चुनाव में एनडीए की ओर से प्रचार भी किए थे। बाद में राज्‍यसभा की यह सीट उन्‍हें दी गई। एनडीए की ओर से उम्‍मीदवार बने और बुधवार को नाम वापसी का समय खत्‍म होने के बाद वे विधिवत राज्‍यसभा के सांसद बन गए। 

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